मीठी गोलियां कितनी कारगर हो सकती हैं? ये सवाल बहुत लोगों के मन में होता है कि मीठी गोलियों का भला कितना असर होगा? ऐसी आशंका स्वाभाविक है. जिस किसी ने भी होम्योपैथी को ठीक से समझा न हो – और न ही कभी तरीके से इलाज न कराया हो, उसके मन में धारणा तो ये रहेगी ही.

ऐसा तब भी हो सकता है जब आप किसी क्वालिफाइड प्रोफेशनल की बजाए किसी दोस्त, परिचित, दवा दुकानदार की सलाह पर दवा लें – और आपको कोई फायदा न हो. ऊपर से कोई दूसरी मुसीबत खड़ी हो जाए.

SWEET-PILLS

ऐसे में अगर कुछ बातों का ध्यान रखा जाए तो मीठी गोलियों के बेअसर होने से बचा जा सकता है –

डॉक्टर चुनें
सबसे पहले तो सोच समझ कर इलाज के लिए एक क्वालिफाइड होम्योपैथ की तलाश करें. पहले ये सुनिश्चित कर लें कि जिस डॉक्टर से आप इलाज कराने की सोच रहे हैं उसके पास कम से कम BHMS की डिग्री जरूर हो. पुराने जमाने में BMS और DMS जैसी डिग्रियां और डिप्लोमा दिये जाते रहे. ऐसे डॉक्टरों से इलाज कराने का फायदा ये होता है कि उनके पास लंबा अनुभव होता है – और वो रोगी की स्थिति को बेहतर तरीके से समझते हैं. पक्का करने के लिए इलाज से पहले डॉक्टर का रजिस्ट्रेशन नंबर चेक कर लेना ठीक होगा.

दवा सही दुकान से लें
आम तौर पर होम्योपैथिक फिजीशियन दवा अपने पास से ही देते हैं, पर कुछ ऐसे भी होते हैं जो दवाएं मेडिकल स्टोर से लेने की सलाह देते हैं. अगर आपको दवा बाजार से लेनी हो तो ये अवश्य देख लें कि आपको सही मिल रही है या नहीं. बेहतर तो यही होगा कि सीलबंद दवा खरीदें. यदि ऐसा न हो पाए तो खुली दवा भी ले सकते हैं, लेकिन दुकानदार सही हो. अगर दवा लेने के बाद फायदा न हो रहा हो तो ये बात अपने डॉक्टर को बताएं – और फिर उसी हिसाब से आगे के बारे में सोचें.

खुद डॉक्टर न बनें

आपने सही डॉक्टर से कंसल्ट किया, दवा भी सही दुकान से खरीदी – अब अगर आराम होते ही आपने दवा बंद कर दी तो ये भी ठीक नहीं होगा. ये मानव स्वभाव है आराम होते ही इंसान लापरवाह हो जाता है, मगर आपको ऐसा नहीं करना चाहिए.
होम्योपैथ में दवाओं की पोटेंसी तो जरूरत के हिसाब से बदली ही जाती है, इलाज के क्रम में दवाइयां भी बदली जाती हैं. ज्यादातर दवाओं के लिए कॉम्प्लीमेंट्री रेमेडीज हैं जो हर क्वालिफाइड होम्योपैथ को पता होती है.
आपके लिए यही सलाह है कि इलाज के दौरान धैर्य बनाए रखें. दवा का तब तक सेवन करें जब तक आपका डॉक्टर आपसे ये न बोल दे कि अब दवा की जरूरत नहीं है.
मान लीजिए, आपने किसी डॉक्टर से दवा ली और हफ्ते भर आपने नियमित रूप से सेवन भी किया – पर कोई फायदा न हुआ. अब फौरन ये फैसला मत कर लीजिए कि दवा अच्छी नहीं है, या डॉक्टर ठीक नहीं है – या फिर, होम्योपैथी में ऐसा ही होता है.
जी नहीं, कई बार ऐसी परिस्थितियां होतीं हैं. ऐसा भी होता है कि डॉक्टर को रोगी की परेशानियों की असली वजह समझ में नहीं आती और वो ऐसी दवा देता है जिससे मूल कारण उभर कर सामने आएं.
इसलिए, आपके मन में कोई भी आशंका हो तो अपने डॉक्टर से मिलें. अपनी बात रखें. अपनी तकलीफ या कोई आशंका भी तो तो बेहिचक शेयर करें.
अगर आपने ऐसी छोटी बातों का ध्यान रखा तो मीठी गोलियां निश्चित रूप से कारगर होंगी.