होम्योपैथी को लेकर ढेरों मिथ (MYTHS) हैं – वजह जो भी हों आम लोगों में ये भ्रम व्याप्त है कि होम्योपैथी चिकित्सा में बड़े पेंच हैं. शायद, ये भी एक वजह है कि बहुत सारे लोग यूं ही होम्योपैथी से दूरी बनाए रखते हैं. आइए ऐसी ही कुछ बातों पर गौर करते हैं.

भ्रम: होम्योपैथिक दवाओं का असर धीरे धीरे होता है.
तथ्य: केस स्टडीज पर गौर करने पर पता चलता है कि ये बात बिलकुल बकवास है. अगर रोगी की तकलीफों के हिसाब से सही रेमेडी (होम्योपैथिक दवाओं को रेमेडी ही कहते हैं) का सेलेक्शन हो गया तो सिर्फ फायदे की बात कौन करे – चमत्कारिक नतीजे देखने को मिलते हैं.

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भ्रम: होम्योपैथिक दवाओं के साथ बहुत परहेज करने पड़ते हैं.
तथ्य: आधुनिक चिकित्सा में भी तो पहले परहेज कराए जाते थे. टीबी की बीमारी होने पर सबसे पहले डॉक्टर दही, चावल और केला न खाने की सलाह देते थे – लेकिन जैसे जैसे नई दवाओं की खोज हुई और कारगर इलाज के रास्ते खोजे गये – ये बातें पीछे छूट गईं. अब टीबी को सर्दी-जुकाम की तरह लिया जाता है – और सब कुछ खाने पीने की सलाह दी जाती है. हां, इस बात पर सबसे ज्यादा जोर दिया जाता है कि दवा नियमित रूप से ली जाए.
होम्योपैथी में डॉक्टर लहसुन, प्याज, हींग, अदरक जैसी चीजें खाने के लिए मना करते हैं क्योंकि साथ में इस्तेमाल से दवाओं का असर कम हो जाता है. वैसे अगर इनसे बचना किसी वजह से मुश्किल हो तो दवा लेने और इनके इस्तेमाल के बीच थोड़ा गैप दिया जा सकता है. मगर, इसके लिए होम्योपैथी से ही दूरी बना लेना तो ठीक नहीं है.
इनके अलावा चाय, कॉफी और तंबाकू के लिए भी डॉक्टर मना करते हैं. अब भला तंबाकू जैसे खतरनाक आइटम के सेवन की सलाह कौन देगा?

भ्रम: होम्योपैथिक दवाओं का कोई साइड इफेक्ट नहीं होता.
तथ्य: इस भ्रम के शिकार लोग तो यहां तक कह डालते हैं कि जब इन दवाओं का कोई असर ही नहीं होता तो साइड इफेक्ट का सवाल ही कहां पैदा होता है.

भ्रम: होम्योपैथिक दवाएं सस्ती होती हैं.
तथ्य: सस्ती और महंगी चीजों को लेकर एक प्रचलित कहावत है – सस्ता रोये बार बार महंगा रोये एक बार. कुछ लोग इसे होम्योपैथिक इलाज से भी जोड़ देते हैं. ऐसा करके वे लोग खुद का तो नुकसान करते ही हैं, दूसरों को भी होम्योपैथी के फायदे से वंचित करने की कोशिश करते हैं.
छोटे शहरों, कस्बों और ग्रामीण इलाकों के बाजारों में छोटी शीशी में होम्योपैथिक दवाएं 7 से 10 रुपये में मिल जाएंगी – लेकिन इन्हीं में कई बार डुप्लीकेट दवाएं भी मिल जाता है.
अच्छी इंडियन रेमेडीज या फिर जर्मन रेमेडीज लेने के लिए तो अच्छी कीमत भी देनी होती है. हां, आधुनिक दवाओं के मुकाबले होम्योपैथी पर खर्च निश्चित रूप से कम आएगा.

[होम्योपैथिक प्रोफेशनल्स से बातचीत और रिसर्च पर आधारित]