ऐसे बहुत लोग मिलते हैं जो होम्योपैथी को बताते तो अच्छा हैं, पर उसी वक्त पूछते हैं – फलां बीमारी का इलाज है होम्योपैथी में?
निश्चित रूप से होम्योपैथी में इलाज तो है लेकिन किसी खास बीमारी का नहीं, बल्कि तकलीफ से तड़प रहे हर बीमार का. आइए इसे सरल तरीके से समझने की कोशिश करते हैं.

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हर मर्ज की कई दवाएं
होम्योपैथिक ट्रीटमेंट में रोग नहीं, बल्कि रोगी को प्राथमिकता दी जाती है. होम्योपैथी की खोज ही इस मकसद के साथ हुई कि रोगी को हर हाल में इलाज से आराम मिले. किसी व्यक्ति को कौन सी बीमारी है – ये बात होम्योपैथी के लिए बहुत महत्वपूर्ण नहीं रह जाती.
मान लीजिए, कोई सिर दर्द से परेशान है – इलाज के दूसरे तरीकों में उसकी एक खास दवा हो सकती है. होम्योपैथी में ऐसा नहीं है. होम्योपैथी में सिरदर्द के लिए सौ से भी ज्यादा दवाएं हो सकती हैं.
मसलन – सिरदर्द अगर दाहिनी तरफ है तो उसके लिए एक दवा हो सकती है, लेकिन अगर बायीं ओर है तो दूसरी दवा होगी. अगर सिरदर्द का असर आंखों पर भी है तो अलग दवा होगी – उसमें भी ज्यादा तकलीफ आंखों की पुतलियों में है तो दवा बदल जाएगी. अगर आंखों के साथ सिरदर्द की चपेट में कान भी हों तो भी किसी और दवा से आराम मिलेगा. तकलीफ अगर दिन में बढ़े तो अलग और रात में बढ़े तो भी अलग. अगर बिस्तर पर लेटने पर आराम मिले और उठते ही तकलीफ बढ़ जाए तो अलग दवा लेनी होगी.

लेकिन इसका कतई ये मतलब नहीं कि एक व्यक्ति को सिरदर्द हो तो दर्जन भर दवाएं लेनी होंगी.

हर मरीज की एक दवा
होम्योपैथी के आविष्कारक डॉ. सैमुअल हैनिमन ने हर मरीज को एक ही दवा देने की सलाह दी है, बशर्ते संभव हो. अगर ऐसा नहीं हो पाता तो साथ में एक या दो और दवाएं भी दी जा सकती हैं.
बात सिरदर्द की हो रही है. हो सकता है किसी रोगी की तकलीफ ऐसी हो कि उसके लिए पांच-सात दवाएं समझ में आ रही हों. ऐसे में उस रोगी के दूसरे लक्षणों पर ध्यान देना होता है. जैसे उसकी प्यास कैसी है? उसे नींद कैसी आ रही है? उसकी पसंद कैसी है – मीठा पसंद है या नमकीन? वो ठंड को लेकर ज्यादा सेंसिटिव है या गर्मी को लेकर?

इसके साथ साथ रोगी की हिस्ट्री भी जाननी होती है. जैसे उसे कोई पुरानी तकलीफ तो नहीं रही है. अगर ऐसी बात है तो उसे वो दवा नहीं दी जा सकती जिससे मरीज की पुरानी तकलीफ पर कोई असर पड़ता हो.
क्वालिफाइड होम्योपैथ इन सारी बातों को ध्यान में रख कर ही रोगी के लिए दवा चुनता है. इसके साथ ही वो ये भी तय करता है कि इलाज की शुरुआत दवा की किस पोटेंसी [6, 30, 200, 1m आदि] से शुरू करनी चाहिए. अगर वो उचित समझता है तो साथ में दूसरी दवा को भी जोड़ लेता है.
मतलब ये है कि चाहे सिरदर्द हो या सिर के बाल गिर रहे हों या फिर कोई और तकलीफ – हर मरीज की दवा अलग हो सकती है. इसलिए इस चक्कर में पड़ने की जरूरत नहीं कि किसी खास
बीमारी का इलाज संभव है या नहीं. अगर आपको कोई तकलीफ है तो किसी क्वालिफाइड होम्योपैथ के पास जाएं – उससे अपनी तकलीफ शेयर करें और उसकी सलाह को ध्यान से सुनें. सलाह मानने न मानने का फैसला आपका हो सकता है – इस बात की आपको पूरी आजादी मिली हुई है.