होम्योपैथी में बरसों पुराना एक अजीब प्रचलन है – रोगी से दवा का नाम छुपाया जाना. दवा को किसी और नाम से लिखना या दवा का नाम रजिस्टर में दर्ज करना और मरीज को सिर्फ नंबर बता देना.

पारदर्शिता तो जरूरी है
हैनिमन कैफे के फेसबुक पेज पर अरुण अरुण ने होम्योपैथी को लेकर बड़ा ही वाजिब सवाल उठाया है. उन्होंने होम्योपैथी की विश्वसनीयता नहीं बल्कि उसकी प्रैक्टिस में जो लोचा है उसे सामने लाने की कोशिश की है.

हैनिमन कैफे की एक पोस्ट पर उनका कमेंट है, “होमियोपैथ कठिन रोगों में भी अपनी अहम भूमिका अपनाता है. ज्यादा से ज्यादा लोग इसका फायदा उठावें, मगर अफसोस के साथ कहना पड़ता है इसके बाधक तत्त्व के रूप में इसके डाक्टर हैं. वे रोगी को जो दवा देते हैं उसका नाम भी नहीं लिखते. वे कोड का इस्तेमाल करते है. ये बातें आप खुद भी देख सकते हैं.”

किसी भी मरीज या उसके परिवार वालों का हक है कि वो जानें कि इलाज क्या चल रहा है. जो दवा उसे दी जा रही है उसका नाम क्या है. उस दवा का उस पर क्या असर पड़ेगा. क्या उस दवा का कोई साइड इफेक्ट भी है?

मगर ऐसा क्यों
क्या डॉक्टर इस बात से डरता है कि मरीज दवा का नाम जान लेगा तो वो मेडिकल स्टोर से दवा खरीद लेगा और उसके पास नहीं आएगा. इससे उसका नुकसान होगा. या उसे लगता है कि मरीज दवा का नाम जान लेता है तो उसे कम महत्व देता है. ऐसे में दवा का असर कम हो सकता है.

एक डॉक्टर बताते हैं कि कुछ दवाएं हैं, जैसे – नक्स वोमिका. इस दवा का नाम ज्यादातर लोग जानते हैं. काफी सोच विचार के बाद जब किसी को ये दवा दी जाती है तो उसे लगता है डॉक्टर ने तो वही दवा दे दी जिसे वो खुद भी जानता है.

तो क्या होम्योपैथिक दवाएं लोगों की आस्था की मोहताज हैं?

अगर किसी मरीज को दवा का नाम जान लेने के बाद उस यकीन नहीं रहता तो क्या दवा फायदा नहीं करेगी. ये तो कोई बात हुई नहीं. दवा तो दवा है. मरीज को यकीन हो न हो उसे काम करना चाहिए. ये तो तंत्र-मंत्र से अपनी दुकान चलाने वाले परेशान लोगों को डराते हैं कि अगर उन्हें उनके प्रयास में भरोसा नहीं रहा तो फायदा नहीं होगा. यही सवाल जब डॉक्टर के सामने रखा जाता है वो अलग प्वाइंट रखते हैं.

डॉक्टर कहते हैं – सवाल आस्था और विश्वास से कहीं आगे है. अगर मरीज को इस बात का भरोसा न हो कि दवा उसे फायदा करेगी या नहीं तो उसका असर होगा या नहीं ये बहस का विषय हो सकता है – लेकिन उससे भी अहम एक और बात है.

डॉक्टर बताते हैं – जब मरीज को पता चल जाता है कि उसे नक्स वोमिका दी गई है तो वो दवा लेने में लापरवाह हो जाता है. और इस लापरवाही का चौतरफा नुकसान होता है. खुद उस मरीज को तो फायदा नहीं ही होता, डॉक्टर और होम्योपैथी दोनों पर सवाल उठने लगते हैं.

चेतावनी/CAUTION: कृपया योग्य डॉक्टर की सलाह के बगैर कोई दवा न लें. ऐसा करना सेहत के लिए नुकसानदेह हो सकता है.

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