FAQ – 006 : होम्योपैथी में खूब परहेज जरूरी है क्या?

# खूब तो नहीं, लेकिन कुछ परहेज जरूरी है. मगर, परहेज को लेकर जितनी चर्चा होती है उससे बहुत कम. वैसे परहेज में बुराई क्या है? परहेज की सलाह तो इसीलिए दी जाती है कि शरीर को ज्यादा नुकसान न हो. परहेज तो उसे भी करने की सलाह दी जाती है जो स्वस्थ हो – मरीज की तो बात ही और है.

बहरहाल, होम्योपैथिक दवाएं देने के साथ ही कोई भी डॉक्टर एक साथ लहसुन, प्याज, हींग, अदरक खाने के लिए मना करता है. साथ में – चाय, कॉफी और सुर्ती-तम्बाकू की भी मनाही होती है.

असल में, होम्योपैथी में मरीज को दी जाने वाली दवा इतनी कम मात्रा में होती है कि किसी भी तरह के गंध से उसका असर कम या खत्म होने की आशंका रहती है. इसीलिए होम्योपैथिक दवाओं को सुगंधित चीजों से भी दूर रखने के लिए कहा जाता है.

बेहतर तो यही हो कि इलाज के वक्त ऐसे परहेज पर कायम रहा जाए. अगर विशेष परिस्थितियों में ऐसा करना संभव न हो तो दवा लेने से एक या दो घंटे पहले और बाद में ये चीजें ली जा सकती हैं.

[यह लेख रिसर्च और होम्योपैथिक डॉक्टरों से बातचीत पर आधारित है.]

चेतावनी/CAUTION: कृपया योग्य डॉक्टर की सलाह के बगैर कोई दवा न लें. ऐसा करना सेहत के लिए नुकसानदेह हो सकता है.

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