मीठी गोलियों की मिठास पर ही न जाएं – मौका आने पर ये स्वीट पिल्स तेज धार चाकू से भी तेज करामात दिखाती हैं. हर क्वालिफाइड होम्योपैथ ने कभी न कभी इसका अनुभव जरूर किया होगा.

होम्योपैथी में एक रेमेडी है Hepar Sulphur – जिस तरह Silicea शरीर के अंदर घुसे कांटे को गूगल की तरह खोज कर सामने ला देती है, बिलकुल वैसे ही Hepar Sulphur काम करता है. जो सर्जरी आधुनिक चिकित्सा पद्धति को लीड रोल प्रदान करती है – होम्योपैथी मीठी मीठी गोलियां खिला कर रोगी को वैसी ही राहत दे देती है. अब सीमाएं तो सभी के लिए हैं. क्या दूसरे सिस्टम फेल नहीं होते?

अगर किसी को शरीर में फोड़ा फुंसी हो जाए तो उसके लिए ये बेहतरीन रेमेडी है. हां, इसके लिए रोगी के कुछ खास लक्षणों पर गौर करना होता है.

अगर किसी को फोड़ा हुआ है और वो उसे छूने से पहले ही चिल्लाने लगे. कहने का मतलब छूने के अहसास भर से ही तेज दर्द का आभास हो – Hepar Sulphur का असर बेजोड़ है. इसे देने के कुछ घंटे के भीतर ही फोड़े से पस निकल कर बाहर आ जाता है और घाव सूख जाता है, लेकिन इसके लिए जरूरत के हिसाब से सही पोटेंसी में दवा देना जरूरी होता है. ये काम कोई भी क्वालिफाइड होम्योपैथ चुटकी बजाते कर सकता है.

वैसे ये सिर्फ इसी काम का नहीं है – और भी कई मामलों में ये सफलतापूर्वक इलाज करता है. इसकी सबसे बड़ी खासियत है कि इसका रोगी ठंड से काफी परेशान रहता है. चाहे कितना भी पहन ओढ़ ले उसे सर्दी लगती रहती है. इसी तरह अगर कोई रोग आधी रात होने के ऐन पहले या फिर सुबह होने से ठीक पहले बढ़ने लगे तो निश्चिच तौर पर इसे लेने से मरीज को तकलीफ से निजात मिल जाएगी.

तो इस तरह कह सकते हैं – होम्योपैथी का चाकू है Hepar Sulphur. मानना पड़ेगा – मीठी गोलियां हैं बड़े काम की.

[यह लेख रिसर्च और होम्योपैथिक डॉक्टरों से बातचीत पर आधारित है.]

चेतावनी/CAUTION: कृपया योग्य डॉक्टर की सलाह के बगैर कोई दवा न लें. ऐसा करना सेहत के लिए नुकसानदेह हो सकता है.

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