हैनिमन कैफे की ओर से हमेशा किसी क्वालिफाइड डॉक्टर की देखरेख में ही दवाएं लेने की सलाह दी जाती है. अब लोग ये सवाल भी पूछने लगे हैं कि कोई अच्छा होम्योपैथ बताइए. बड़ा मुश्किल है इस सवाल का जवाब. इसका कोई तय पैमाना नहीं हो सकता. फिर भी लोगों की उलझन दूर करने की कोशिश की जा सकती है.
सबसे पहले तो ये सुनिश्चित कर लें कि आपका होम्योपैथ रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर जरूर हो. ऐसी ही कुछ और भी बातें हैं जो आपके काम आ सकती हैं.

क्वालिफाइड क्यों?
अगर नहीं तो क्या आप किसी भी ऐरे गैरे से अपनी आंख या किसी और अंग की सर्जरी करा लेंगे? नहीं ना. अगर नहीं तो फिर ऐसे ही किसी शौकिया व्यक्ति से दवा क्यों लेना चाहिये?
क्वालिफाइड से मतलब है कि उसने होम्योपैथिक इलाज की प्रोफेशनल ट्रेनिंग ली हो. उसे पता हो कि शरीर में कौन अंग कहां है – और वे कैसे काम करते हैं. जो दवा दी जा रही है उसका किस अंग पर क्या प्रभाव पड़ेगा? जिसे इन बातों की ठीक समझ होगी आखिर वही तो सही इलाज करेगा.
बहुत से लोग शौकिया तौर पर होम्योपैथिक इलाज शुरू कर देते हैं. मैटीरिया मेडिका से लेकर होम्योपैथी की तमाम किताबें बाजार में उपलब्ध हैं. जिसे जिस भाषा की समझ हो वो उन्हें लेकर पढ़ सकता है. इसमें कोई बुराई नहीं. ज्ञान प्राप्त करने में कोई हर्ज नहीं है, लेकिन अधूरे ज्ञान के साथ किसी काम को अंजाम देने के पीछे क्या तर्क है?
ऐसे शौकिया लोग एक या दो किताबें खरीद कर पढ़ लेते हैं, लेकिन उनसे बात कीजिए तो उन्होंने ‘ऑर्गेनन ऑफ मेडिसिन’ का नाम भी नहीं सुना होता. ‘ऑर्गेनन ऑफ मेडिसिन’ खुद होम्योपैथी के संस्थापक डॉक्टर सैमुअल हैनिमन ने लिखी है जिसमें होम्योपैथी के मूलभूत सिद्धांतों का विस्तार से जिक्र है.
सिर्फ इतना नहीं है कि होम्योपैथी में कुछ लक्षण जान कर कोई या कुछ दवाएं देकर इतिश्री कर ली जाए. होम्योपैथी में अगर किसी मरीज के लिए एक दवा चुनी जाती है तो उसकी पूरक दवा पर भी गौर करना होता है. इतना ही नहीं, उन दवाओं पर भी ध्यान देना होता है जिनकी चुनी हुई दवा को देने के बाद उसकी मनाही है. क्या एक या दो किताब पढ़ कर ये सब मालूम हो सकता है?

समय और सवाल
होम्योपैथी में डॉक्टर किसी मरीज पर कितना वक्त देता है और कितने सवाल पूछता है, बहुत मायने रखते हैं.
अव्वल तो अनुभवी होम्योपैथ मरीज को सामने से आते देख ही उसके लिए कुछ दवाएं चुन कर रख लेता है. होम्योपैथ इस बात को भी बारीकी से ऑब्जर्व करता है कि मरीज की चाल ढाल कैसी है. अगर बीमारी की हालत में भी मरीज किसी तंदुरुस्त व्यक्ति की तरह चल रहा है तो ये बात दवा चुनने में सहायक हो सकती है. फिर क्लिनिक में आने के बाद उसके बैठने का अंदाज कैसा है. आस पास की चीजों को लेकर उसका क्या रिस्पॉन्स है?
होम्योपैथी में रोग शरीर के किस साइड है? रोगी को मीठा और नमकीन में से क्या पसंद है? रोग का प्रभाव कब घटता और बढ़ता है? ऐसी बातों का बहुत महत्व है. जब डॉक्टर किसी मरीज पर समय देगा और उससे ऐसे सवाल करेगा तभी तो उसके इलाज के लिए सही दवा चुन पाएगा.
अगर कोई डॉक्टर इन बातों पर गौर नहीं करता एक बार उसके बारे में दोबारा विचार करना चाहिए.

कितनी दवाएं
इलाज के बाकी तरीकों की तरह होम्योपैथी में ये नहीं चल सकता कि बुखार है तो एक दवा दे दी जाए और सिर दर्द है तो कोई पेन किलर दे दिया जाए. उसके साथ लूज मोशन हो रहा है तो उसके लिए एक और दवा प्रेस्क्राइब कर दी जाए.
हैनिमन ने हर मरीज के लिए एक ही दवा देने की साफ तौर पर हिदायत दी है. ये यूं ही नहीं है, इसके पीछे उनके सॉलिड तर्क हैं. होम्योपैथिक दवाओं का बीमारियों के नाम से कोई मतलब नहीं होता – वे तो अकेले ही एक इंसान की सारी तकलीफों को खत्म करने की क्षमता रखती हैं. बशर्ते, कोई डॉक्टर ऐसा कर पाने में खुद भी सक्षम हो.
अगर कोई डॉक्टर एक ही दिन में दो या तीन से ज्यादा दवाएं देता है तो समझ लीजिए कि या तो उसकी समझ सही नहीं है या खुद पर उसे भरोसा नहीं है. फिर ऐसे डॉक्टर से इलाज किस काम का.

कंप्यूटर का इस्तेमाल
पहले होम्योपैथिक डॉक्टरों की टेबल पर ढेरों किताबें रखी रहती थीं. कई कॉमेडियन इस बात के लिए उनका अक्सर मजाक भी उड़ाते रहते थे. अब किताबों की जगह कंप्यूटर ने ले ली है. अब अगर कोई ये कहे कि फलां डॉक्टर कंप्यूटर से देख कर दवाएं देता है तो इसमें कोई गलत बात नहीं है. तकनीके के इस दौर में उसका पूरा इस्तेमाल होना चाहिए. हालांकि, इसका मतलब ये नहीं कि जो कंप्यूटर का सॉफ्टवेयर बता दे उसे लकीर का फकीर मान कर दवा दे दी जाए.
अगर ऐसे इलाज होता तो 80 साल के उस बुजुर्ग को ओपियम से शायद ही पेशाब उतर पाती (केस स्टडी). कंप्यूटर के इस्तेमाल के साथ ही जरूरी है कि डॉक्टर अपने अनुभव और विवेक का भरपूर इस्तेमाल करता हो – और इतना सब करने के बाद कोशिश करे कि दवाएं एक से ज्यादा न देता हो.

सिर्फ होम्योपैथी या
होम्योपैथी में एक साथ कई मदर टिंक्चर मिला कर दिये जा सकते हैं. शर्त सिर्फ इतनी है कि मिश्रण किसी गलत दिशा में न ले जा रहा हो. अगर ऐसा ही पोटेंसी की दवाओं जिनमें हायर पोटेंसी भी शुमार हो होने लगे तो भगवान ही मालिक है. कुछ डॉक्टर ऐसा करते देखे जा सकते हैं.
होम्योपैथिक दवाओें के साथ अगर कोई डॉक्टर आधुनिक चिकित्सा पद्धति या किसी और तरीके से तैयार दवाएं प्रेस्क्राइब करता है तो ये न सिर्फ सिद्धांतों के खिलाफ है, बल्कि कानूनी तौर पर भी सही नहीं है.

हैनिमन कैफे इस तरीके से इलाज की सलाह नहीं देता – लेकिन किसी को मना भी नहीं करता क्योंकि हर किसी को इस बात की आजादी संविधान और कानून से मिली हुई है. उम्मीद है इन बातों पर ध्यान देकर आप अपने लिए यानी अपने हिसाब से एक अच्छे डॉक्टर की तलाश कर पाएंगे. इसके लिए हैनिमन कैफे की ओर से ढेरों शुभकामनाएं.

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चेतावनी/CAUTION: कृपया योग्य डॉक्टर की सलाह के बगैर कोई दवा न लें. ऐसा करना सेहत के लिए नुकसानदेह हो सकता है.

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