हम तो यही मान कर चल रहे थे कि हैनिमन कैफे के पोस्ट से आपको फायदा जरूर होता होगा. अब लग रहा है कि हैनिमन कैफे के पोस्ट के भी कुछ न कुछ साइड इफेक्ट जरूर होते हैं. कहने को तो लोग कहते हैं कि होम्योपैथिक दवाओं का कोई साइड इफेक्ट नहीं होता, लेकिन हम इस बात से इत्तेफाक नहीं रखते. इस मसले पर विस्तार से कभी और बात करेंगे. फिलहाल, मुद्दा अलग है.

ये मुद्दा है हैनिमन कैफे के पोस्ट की उपयोगिता का. क्या हैनिमन कैफे के पोस्ट की कोई उपयोगिता नहीं है? क्या हैनिमन कैफे के पोस्ट से किसी को कोई फायदा नहीं होता?
अगर ऐसा है तो पोस्ट फेसबुक पर शेयर करने पर लाइक और टिप्पणियां क्या महज टाइमपास हैं? क्या लोगों के पास इतना फ्री वक्त है कि वे साइट पर आकर भी कमेंट कर जाते हैं?
ऐसा हमें नहीं लगता. और इस बात के सबूत हैं हमारे पास हर रोज आने वाले आप सभी के ढेरों मैसेज. अपने मैसेज के जरिये लोग हम से होम्योपैथी से जु़ड़े सवाल भी पूछते हैं और तरह तरह के सुझाव और सलाह भी देते हैं. कुछ लोगों की ऐसी ही सलाह पर हमने केंट होमियो सदन के सहयोग से हम वाराणसी में पिछले छह महीने में कई कैंप क्लिनिक का आयोजन भी कर चुके हैं. सीमित संसाधनों के चलते ये कैंप महीने में सिर्फ दो बार ही संभव हो पाते हैं. कैंप के आयोजन के पीछे मकसद यही रहा है कि लोग क्वालिफाइड होम्योपैथिक प्रैक्टिशनर से मिल कर निजी सलाह ले सकें.

ये पोस्ट लिखने की खास वजह है एक टिप्पणी. हैनिमन कैफे के एक विजिटर की एक टिप्पणी ने इस मुद्दे पर हमारा ध्यान खींचा. टिप्पणी थी – ‘जब योग्य डॉक्टर के पास जाना ही है तो डॉक्टर बीमारी के अनुसार दवाई दे ही देगा. तो फिर आप के लेख पढ़ने का क्या उपयोग है?’

आपने ध्यान दिया होगा, हम तकरीबन सभी पोस्ट में सलाह देते हैं कि किसी योग्य होम्योपैथ की देखरेख में ही दवाएं लें. हम कभी इस बात का सपोर्ट नहीं करते कि आप मेडिकल स्टोर पर बैठे शख्स से पूछ कर दवा लें. इसकी सबसे बड़ी वजह है कि कोई क्वालिफाइड डॉक्टर ही समझ सकता है कि किसी भी मरीज के लिए कौन सी दवा सबसे सही होगी. योग्य डॉक्टर ही इस बात को समझ सकता है कि एक दवा देने के बाद मरीज को तकलीफ से पूरी तरह निजात दिलाने के लिए दूसरी दवा कौन सी हो सकती है.
महज एक-दो किताब पढ़ लेने या फिर मेडिकल स्टोर पर बैठ कर दवा बेचने से ये समझ कभी नहीं हो सकती. यही नहीं, इसका सबसे बड़ा नुकसान ये है कि होम्योपैथी की बदनामी भी इसीलिए होती है. फिर लोगों में होम्योपैथी को लेकर तरह तरह की धारणाएं बन जाती हैं. कई पोस्ट में हमने ऐसी भ्रांतियों और धारणाओं पर तस्वीर साफ करने की कोशिश भी की है.

अब इस बात का मूल्यांकन करना हमारा काम नहीं कि हैनिमन कैफे की पोस्ट पढ़ने से किसे क्या फायदा हो सकता है? हमारी कोशिश रहती है कि होम्योपैथी के बारे में आसान शब्दों में सही जानकारी दी जाये. लोगों को उन सवालों के जवाब मिल सकें जो उनके मन में होम्योपैथी को लेकर अक्सर उठते हैं. ऐसे सवाल पूछने के लिए उनके पास कोई मौका नहीं होता. जो डॉक्टर इन सवालों का जवाब दे सकते हैं उनके पास इतना वक्त नहीं होता. जिनके पास वक्त होता है उनके पास सवालों का जवाब नहीं होता. न तो मेडिकल स्टोर पर बैठा कोई शख्स ये सब समझा सकता है और न ही दो-चार किताबें पढ़ लेने से ये बातें मालूम हो सकती हैं.

अगर किसी को भी हमारी इन पोस्ट से कोई फायदा नहीं समझ आये तो हमारी यही सलाह होगी कि वो अपना समय बर्बाद न करें. फिर भी अगर उन्हें लगता है कि हमारी पोस्ट की वजह से उनका वक्त बर्बाद हुआ तो हम क्षमाप्रार्थी हैं.
बावजूद इसके हर किसी को हमारी यही सलाह होगी कि हैनिमन कैफे की पोस्ट से वो अपनी जानकारी बढ़ाएं, समझ बढ़ाएं लेकिन इलाज के लिए हमेशा किसी योग्य डॉक्टर के पास ही जायें.
हमारा काम है आपको सही जानकारी देना और फर्ज है आपको समय समय पर आगाह करना. फिर भी मर्जी आपकी – लेकिन याद रहे, मुफ्त की सलाह और सड़क किनारे मिलने वाला इलाज का नुस्खा खतरनाक हो सकता है.
आखिर में हमारी गुजारिश है कि हैनिमन कैफे की टैगलाइन पर गौर करें : मीठी गोलियां हैं बड़े काम की – आइए होम्योपैथी को समझने की कोशिश करें. शुक्रिया.

चेतावनी/CAUTION: कृपया योग्य डॉक्टर की सलाह के बगैर कोई दवा न लें. ऐसा करना सेहत के लिए नुकसानदेह हो सकता है.

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