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Posts for Category : मानसिक रोग

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ये 5 दवाएं शरीर में Calcium और Vitamin D3 की कमी को पूरा कर देंगी

हैनिमन कैफे के कंसल्टैंट होम्योपैथ के अनुसार इन चारों दवाओं का मदर टिंक्चर एक साथ मिला कर लिया जा सकता है. दो-तीन हफ्ते लेने के बाद जांच से स्थिति का पता करने के बाद जरूरत के हिसाब से इसे जारी रखा जाए या नहीं इसका फैसला किया जा सकता है.

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वेट लॉस का बेस्ट फॉर्मूला – मीठी गोलियां और भर पेट भोजन – बस और कुछ नहीं

संभावित दवाएं – अगर वजन सामान्य से ज्यादा है तो वो किसी बीमारी की वजह से हो सकता है. अगर सामान्य से कम है तो भी किसी न किसी रोग की वजह से ही होगा. इसलिए जरूरी है कि उस खास रोग के लिए उपाय किये जाएं – बाकी समस्या अपनेआप खत्म हो जाएगी.


काले घने और सुंदर बालों के लिए मीठी गोलियों की चार खुराक काफी है

अब अगर किसी वजह से बाल गिरने लगें या कम उम्र में ही सफेद हो जाएं तो उपचार जरूरी हो जाता है. सबको यही सलाह है कि कलर करने या कोई अन्य उपाय करने से पहले किसी क्वालिफाइड होम्योपैथ से जरूर संपर्क करें.


संभावित दवाएं
+ Lycopodium और Acid Phos –

faq homoeopathy

FAQ – 008 : क्या एलोपैथिक दवाओं (Modern Medicines) के साथ होम्योपैथिक दवाएं ली जा सकती हैं?

हैनिमन के सिद्धांतों के अनुसार एक मरीज के लिए सिर्फ एक दवा ही बेस्ट होती है, बल्कि कहें तो सही होती है. ये बात पोटेंसी फॉर्म की दवाओं पर ही लागू होती है क्योंकि कई मदर टिंक्चर एक साथ मिला कर भी दिये जा सकते हैं.


Belladonna and Sulphur

हर चीज की तरह होम्योपैथी को भी अपनी हद है, अपनी ही थ्योरी के कारण

होम्योपैथी की खोज जिस समानता की थ्योरी पर हुई उसकी कुछ अपनी सीमाएं हैं. इसके तहत होम्योपैथिक रेमेडीज रोगी के शरीर में एक छद्म रोग की अवस्था (जब रोग बढ़ा हुआ या घटा हुआ प्रतीत होता है) पैदा कर देती है जिसके प्रभाव से असल रोग का प्रभाव खत्म हो जाता है. कुछ देर बाद छद्म रोग की अवस्था भी खत्म हो जाती है –

हर मर्ज का तो नहीं लेकिन हर मरीज का इलाज जरूर है होम्योपैथी में

ऐसे बहुत लोग मिलते हैं जो होम्योपैथी को बताते तो अच्छा हैं, पर उसी वक्त पूछते हैं – फलां बीमारी का इलाज है होम्योपैथी में?
निश्चित रूप से होम्योपैथी में इलाज तो है लेकिन किसी खास बीमारी का नहीं, बल्कि तकलीफ से तड़प रहे हर बीमार का. आइए इसे सरल तरीके से समझने की कोशिश करते हैं.

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हर मर्ज की कई दवाएं
होम्योपैथिक ट्रीटमेंट में रोग नहीं,

होम्योपैथी को लेकर भ्रम न पालें, पहले इस्तेमाल करें फिर विश्वास करें

होम्योपैथी को लेकर ढेरों मिथ (MYTHS) हैं – वजह जो भी हों आम लोगों में ये भ्रम व्याप्त है कि होम्योपैथी चिकित्सा में बड़े पेंच हैं. शायद, ये भी एक वजह है कि बहुत सारे लोग यूं ही होम्योपैथी से दूरी बनाए रखते हैं. आइए ऐसी ही कुछ बातों पर गौर करते हैं.

भ्रम: होम्योपैथिक दवाओं का असर धीरे धीरे होता है.

मीठी गोलियां कितनी कारगर – I

मीठी गोलियां कितनी कारगर हो सकती हैं? ये सवाल बहुत लोगों के मन में होता है कि मीठी गोलियों का भला कितना असर होगा? ऐसी आशंका स्वाभाविक है. जिस किसी ने भी होम्योपैथी को ठीक से समझा न हो – और न ही कभी तरीके से इलाज न कराया हो, उसके मन में धारणा तो ये रहेगी ही.

ऐसा तब भी हो सकता है जब आप किसी क्वालिफाइड प्रोफेशनल की बजाए किसी दोस्त,

जर्मन रेमेडीज ही क्यों, इंडियन क्यों नहीं?

आपने ध्यान दिया होगा अक्सर होम्योपैथिक फिजीशियन जर्मन रेमेडीज लेने की सलाह देते हैं. इंडियन दवाएं लेने की बात तब होती है जब महंगी जर्मन दवाएं लेना संभव न हो.
तो क्या इंडियन दवाएं ठीक नहीं होतीं. क्या इंडियन होम्योपैथिक रेमेडीज का असर नहीं होता. आइए एक वाकये से इसे समझने की कोशिश करते हैं.

घर में किसी को कुछ तकलीफ थी.

वर्ल्ड होम्योपैथिक डे – आज कुछ मीठा तो हो ही जाए

बनारस से हम लोग मडुवाडी-दिल्ली एक्सप्रेस में सवार हुए. हम दोनों की नीचे वाली बर्थ थी. ऊपर वाली दोनों बर्थ खाली थी. टीटीई ने बताया कि वो इलाहाबाद का कोटा है. हम लोग खा-पीकर सो गये.

आधी रात को कोटा पूरा होने का वक्त आ गया. जब हमारी नींद खुली तो दो लोग दिखे. एक आदमी सामान भी रख रहा था –

वर्ल्ड होम्योपैथिक डे की बधाई!

वर्ल्ड होम्योपैथिक डे की हैनिमन कैफे की ओर से बहुत बहुत बधाई. आपके जीवन में इतनी मिठास बनी रहे कि इलाज के लिए मीठी गोलियों की भी जरूरत न पड़े.[पूरा पढ़ें]



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