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Posts for Tag : जर्मन

Belladonna and Sulphur

आंखों की बिलनी से निजात दिलानेवाली ये हैं तीन दवाएं

अगर आंखों को वे अपना कार्यक्षेत्र बना लें फिर तो नींद ही नहीं जीना हराम कर देते हैं.
पलकों पर होने वाली ऐसी ही फुंसियों को बिलनी, गुहेरी या गुहाज्जनी भी कहते हैं. इनकी हर अवस्था बड़ी कष्टकारी होती है – जब निकल आएं, उनमें पस भर आए या फिर फूट कर पस बहने लगे.

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FAQ – 014 : होम्योपैथिक दवाएं कुछ खाने के बाद लेनी चाहिए या बिलकुल खाली पेट?

पेट की बीमारियों में कुछ दवाएं खाने के पहले और बाद में लेना ठीक होता है. ऐसा करने का फायदा ये होता है कि पहले दवा लेकर तकलीफ से बचा जा सकता है और बाद में फौरन आराम मिल जाता है.

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ये 5 दवाएं शरीर में Calcium और Vitamin D3 की कमी को पूरा कर देंगी

हैनिमन कैफे के कंसल्टैंट होम्योपैथ के अनुसार इन चारों दवाओं का मदर टिंक्चर एक साथ मिला कर लिया जा सकता है. दो-तीन हफ्ते लेने के बाद जांच से स्थिति का पता करने के बाद जरूरत के हिसाब से इसे जारी रखा जाए या नहीं इसका फैसला किया जा सकता है.

faq homoeopathy

FAQ – 012 : अगर पूरे शरीर में जगह जगह गांठ हो गई हो तो कौन सी दवा लेनी चाहिए?

कई बार ये गांठें दूसरी वजहों से भी बन जाती हैं. मसलन, हमारे शरीर की खासियत है कि जब उसे लगता है कि कोई बाहरी वस्तु (Foreign Body) घुस गई है तो अपनेआप वो उसे चारों ओर से घेर लेता है – ताकि वो शरीर को कोई नुकसान पहुंचाने के लायक न रहे.

Belladonna and Sulphur

हर चीज की तरह होम्योपैथी को भी अपनी हद है, अपनी ही थ्योरी के कारण

होम्योपैथी की खोज जिस समानता की थ्योरी पर हुई उसकी कुछ अपनी सीमाएं हैं. इसके तहत होम्योपैथिक रेमेडीज रोगी के शरीर में एक छद्म रोग की अवस्था (जब रोग बढ़ा हुआ या घटा हुआ प्रतीत होता है) पैदा कर देती है जिसके प्रभाव से असल रोग का प्रभाव खत्म हो जाता है. कुछ देर बाद छद्म रोग की अवस्था भी खत्म हो जाती है – और दवा लेने वाला निरोग हो जाता है.

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FAQ – 005 : होम्योपैथी में दवा मांगने पर दुकानदार पोटेंसी पूछते हैं – इसका क्या मतलब होता है?

पोटेंसी होम्योपैथिक दवाओं की शक्ति या पॉवर होती है. कम पोटेंसी की दवाएं जल्दी जल्दी दोहराई जा सकती हैं जबकि ज्यादा पोटेंसी वाली दवाओं को देर से लेना होता है.

चाहनेवालों को बहुत बहुत धन्यवाद और डॉक्टर हैनिमन को बधाई!

बहुत लोगों ने अपनी परेशानी भी शेयर की है – और उसके लिए दवा पूछी है. कई लोगों का तो यहां तक कहना है कि वो इलाज कराते कराते परेशान हो गये हैं और थक चुके हैं. हमारे लिए ये बात बहुत महत्वपूर्ण है. हमारी कोशिश है कि हम जल्द से जल्द उनकी मदद के लिए कुछ उपाय कर सकें.

होम्योपैथी को लेकर भ्रम न पालें, पहले इस्तेमाल करें फिर विश्वास करें

होम्योपैथी को लेकर ढेरों मिथ (MYTHS) हैं – वजह जो भी हों आम लोगों में ये भ्रम व्याप्त है कि होम्योपैथी चिकित्सा में बड़े पेंच हैं. शायद, ये भी एक वजह है कि बहुत सारे लोग यूं ही होम्योपैथी से दूरी बनाए रखते हैं. आइए ऐसी ही कुछ बातों पर गौर करते हैं.

भ्रम: होम्योपैथिक दवाओं का असर धीरे धीरे होता है.
तथ्य: केस स्टडीज पर गौर करने पर पता चलता है कि ये बात बिलकुल बकवास है.

जर्मन रेमेडीज ही क्यों, इंडियन क्यों नहीं?

आपने ध्यान दिया होगा अक्सर होम्योपैथिक फिजीशियन जर्मन रेमेडीज लेने की सलाह देते हैं. इंडियन दवाएं लेने की बात तब होती है जब महंगी जर्मन दवाएं लेना संभव न हो.
तो क्या इंडियन दवाएं ठीक नहीं होतीं. क्या इंडियन होम्योपैथिक रेमेडीज का असर नहीं होता. आइए एक वाकये से इसे समझने की कोशिश करते हैं.

घर में किसी को कुछ तकलीफ थी. डॉक्टर ने जो दवा बताई संयोगवश घर में ही थी.


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