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Posts for Tag : धारणाएं

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हैनिमन कैफे पर लोगों के ज्यादातर सवालों के जवाब दिये जाते हैं, मगर सभी क्यों नहीं

ये कहानी जानने के बाद उन सभी को मालूम हो गया होगा कि उनके सवालों के जवाब अब तक क्यों नहीं मिले और ये यकीन भी हो गया होगा कि जवाब जरूर मिलेंगे. यहां भी देर है, पर अंधेर नहीं. संसाधनों को लेकर हमारी भी कुछ मजबूरियां हैं, मगर कोशिशों में कमी नहीं करते. अब तक हमारे साथ बने रहने के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया.

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सफेद दाग से छुटकारा पाना थोड़ा मुश्किल जरूर है, मगर नामुमकिन तो नहीं

दवा के साथ धैर्य की बहुत जरूरत होती है क्योंकि इलाज लंबा चलना है और जल्दी असर भी समझ नहीं आता. हां, गौर करने वाली एक बात है कि इलाज शुरू होने के कुछ दिन बाद सफेद जगह के बीच त्वाचा के रंग के डॉट्स दिखने लगते हैं. ये दवा के असर के सबूत हैं. धीरे धीरे ये डॉट्स बड़े होते हैं और फिर सफेद जगह भी बाकी त्वचा के रंग माफिक हो जाती है.

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Eupatorium Perf से डेंगू को ठीक करने का दावा कितना सही है?

अब बीमारी का नाम डेंगू हो या फिर चिकनगुनिया या फिर सामान्य सर्दी जुकाम Eupatorium Perf से फायदा हो सकता है, लेकिन छू मंतर जैसी कोई बात नहीं है.


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सेल्फ हेल्प : पाइल्स से छुटकारा पाने वाले एक व्यक्ति की सक्सेस स्टोरी

मैं इलाज से थक चुका था. मैंने डॉक्टर की बतायी सभी सावधानियां बरतीं और दवाएं भी लीं मगर कोई सुधार नजर नहीं आया. दोपहर कम ही खूबसूरत होती है. उस दिन अचानक मुझे एक उपाय सूझी. मुझे अपने बचपन का वाकया याद आया. जब हमलोग बच्चे थे


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FAQ: होम्योपैथिक दवाएं कैसे लेनी चाहिये – कितनी गोली, कितने बूंद और कितनी बार?

दो बूंद जिंदगी के – ये लाइन तो हर किसी के मन में अपने आप आ जाती है. होम्योपैथी में ये प्रैक्टिस इसकी शुरुआत से ही है. अक्सर देखा जाता है कि डॉक्टर मरीज की जीभ पर दवा की दो बूंद डाल देते हैं.


Belladonna and Sulphur

आंखों की बिलनी से निजात दिलानेवाली ये हैं तीन दवाएं

अगर आंखों को वे अपना कार्यक्षेत्र बना लें फिर तो नींद ही नहीं जीना हराम कर देते हैं.
पलकों पर होने वाली ऐसी ही फुंसियों को बिलनी, गुहेरी या गुहाज्जनी भी कहते हैं. इनकी हर अवस्था बड़ी कष्टकारी होती है – जब निकल आएं, उनमें पस भर आए या फिर फूट कर पस बहने लगे.

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ये 3 दवाएं प्रसव की प्रक्रिया आसान बना सकती हैं

ये 3 दवाएं प्रसव की प्रक्रिया आसान बना सकती हैं
Biocomb 26 – ये Biochemic मेडिसिन डॉक्टर की सलाह से ड्यू डेट से तीन हफ्ते पहले शुरू की जा सकती है.


NUX VOMICA

वेट लॉस का बेस्ट फॉर्मूला – मीठी गोलियां और भर पेट भोजन – बस और कुछ नहीं

संभावित दवाएं – अगर वजन सामान्य से ज्यादा है तो वो किसी बीमारी की वजह से हो सकता है. अगर सामान्य से कम है तो भी किसी न किसी रोग की वजह से ही होगा. इसलिए जरूरी है कि उस खास रोग के लिए उपाय किये जाएं – बाकी समस्या अपनेआप खत्म हो जाएगी.


ऐसे करें अपने लिए एक अच्छे होम्योपैथिक डॉक्टर की तलाश

क्वालिफाइड क्यों?
अगर नहीं तो क्या आप किसी भी ऐरे गैरे से अपनी आंख या किसी और अंग की सर्जरी करा लेंगे? नहीं ना. अगर नहीं तो फिर ऐसे ही किसी शौकिया व्यक्ति से दवा क्यों लेना चाहिये?
क्वालिफाइड से मतलब है कि उसने होम्योपैथिक इलाज की प्रोफेशनल ट्रेनिंग ली हो. उसे पता हो कि शरीर में कौन अंग कहां है –

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FAQ – 009 : लंबाई (HEIGHT) बढ़ाने के लिए होम्योपैथी में क्या उपाय है?

कुछ खास चीजों के अलावा इंसान की हाइट में थायरायड ग्लैंड से सप्लाई होने वाले थायराक्सिन हॉर्मोन की अहम भूमिका होती है. अगर ये हॉर्मोन ज्यादा मात्रा में निकलने लगे तो इंसान जरूरत से ज्यादा लंबा भी हो सकता है और कम मात्रा में होने पर छोटा हो जाता है.

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FAQ – 008 : क्या एलोपैथिक दवाओं (Modern Medicines) के साथ होम्योपैथिक दवाएं ली जा सकती हैं?

हैनिमन के सिद्धांतों के अनुसार एक मरीज के लिए सिर्फ एक दवा ही बेस्ट होती है, बल्कि कहें तो सही होती है. ये बात पोटेंसी फॉर्म की दवाओं पर ही लागू होती है क्योंकि कई मदर टिंक्चर एक साथ मिला कर भी दिये जा सकते हैं.


क्या होम्योपैथी में कैंसर, टीबी, HIV/एड्स का कोई कारगर इलाज है?

कोलकाता का एक वाकया है, तब जब इसे कैलकटा बोलने का प्रचलन रहा. एक बुजुर्ग जिनकी उम्र 80 साल के आस पास रही उन्हें प्रोस्टेट ग्लैंड की तकलीफ रही. डॉक्टर ने सर्जरी की सलाह दी.
जब ऑपरेशन थियेटर के लिए जाने लगे तो उन्होंने सर्जन से पूछा, “क्या इस ऑपरेशन में मेरी मौत भी हो सकती है?”

FAQ – 007 : होम्योपैथिक दवाइयां जड़ी-बूटियों से ही बनती हैं या केमिकल से भी?

होम्योपैथिक दवाओं के सोर्स भी बड़े दिलचस्प हैं. इनके स्रोत पेड़-पौधे और केमिकल तो हैं ही, ये दवाएं सांप के विष से लेकर टीबी के मवाद तक से बनाई जाती हैं.


Belladonna and Sulphur

हर चीज की तरह होम्योपैथी को भी अपनी हद है, अपनी ही थ्योरी के कारण

होम्योपैथी की खोज जिस समानता की थ्योरी पर हुई उसकी कुछ अपनी सीमाएं हैं. इसके तहत होम्योपैथिक रेमेडीज रोगी के शरीर में एक छद्म रोग की अवस्था (जब रोग बढ़ा हुआ या घटा हुआ प्रतीत होता है) पैदा कर देती है जिसके प्रभाव से असल रोग का प्रभाव खत्म हो जाता है. कुछ देर बाद छद्म रोग की अवस्था भी खत्म हो जाती है –

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FAQ – 006 : होम्योपैथी में खूब परहेज जरूरी है क्या?

होम्योपैथिक दवाएं देने के साथ ही कोई भी डॉक्टर एक साथ लहसुन, प्याज, हींग, अदरक खाने के लिए मना करता है. साथ में – चाय, कॉफी और सुर्ती-तम्बाकू की भी मनाही होती है.


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क्या होम्योपैथी लोगों की आस्था की मोहताज है?

किसी भी मरीज या उसके परिवार वालों का हक है कि वो जानें कि इलाज क्या चल रहा है. जो दवा उसे दी जा रही है उसका नाम क्या है. उस दवा का उस पर क्या असर पड़ेगा. क्या उस दवा का कोई साइड इफेक्ट भी है?


चाहनेवालों को बहुत बहुत धन्यवाद और डॉक्टर हैनिमन को बधाई!

बहुत लोगों ने अपनी परेशानी भी शेयर की है – और उसके लिए दवा पूछी है. कई लोगों का तो यहां तक कहना है कि वो इलाज कराते कराते परेशान हो गये हैं और थक चुके हैं. हमारे लिए ये बात बहुत महत्वपूर्ण है. हमारी कोशिश है कि हम जल्द से जल्द उनकी मदद के लिए कुछ उपाय कर सकें.

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FAQ – 004 : होम्योपैथिक दवाओं की एक बार में कितनी गोलियां लेनी चाहिए?

कितनी गोलियां लेना है ये तो मेडिकल स्टोर वाले से भी पूछा जा सकता है, लेकिन दवा की दूसरी बार और उसके बाद कब लेनी है इसमें तो डॉक्टर की ही सलाह माननी चाहिए.


जब दाग अच्छे हो सकते हैं तो होम्योपैथी से क्यों दिक्कत है?

अगर दाग लगने से कुछ अच्छा हो तो – किसी को दिक्कत क्या है? ‘दाग अच्छे हैं’ – कहने में बुराई क्या है? भले ही ये एक प्रोडक्ट बेचने के लिए स्लोगन हो, लेकिन बात में तो वाकई दम है. इस दुनिया में तो कुछ ऐसी चीजें भी हैं जिन्हें आवश्यक बुराई मानते हुए भी खुले मन से स्वीकार किया जाता है.

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FAQ – 003 : होम्योपैथी की दवा लिक्विड में लेना ठीक रहता है या गोली में?

होम्योपैथिक दवा चाहे गोली में ली जाए या लिक्विड में दोनों में से किसी भी तरीके से लेने से कोई फर्क नहीं पड़ता. गोली पूरी तरह सूख भी गई हो तो कुछ दिन तक उसमें दवा का असर रहता है.



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