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आखिर किसी बीमारी की होम्योपैथिक दवा बताना मुश्किल क्यों है – ये हैं 7 कारण

भट्टी साहब के कटाक्ष के लिए ये टॉपिक तो बेहतरीन रहा, लेकिन इसमें हर होम्योपैथिक डॉक्टर की मजबूरी भी छिपी हुई है और हैनिमन कैफे की भी – क्योंकि एक ही तकलीफ के लिए दो अलग व्यक्तियों के लिए बिलकुल अलग अलग दवाएं हो सकती हैं. कुछ उदाहरणों पर आप भी गौर फरमाइये –

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सफेद दाग से छुटकारा पाना थोड़ा मुश्किल जरूर है, मगर नामुमकिन तो नहीं

दवा के साथ धैर्य की बहुत जरूरत होती है क्योंकि इलाज लंबा चलना है और जल्दी असर भी समझ नहीं आता. हां, गौर करने वाली एक बात है कि इलाज शुरू होने के कुछ दिन बाद सफेद जगह के बीच त्वाचा के रंग के डॉट्स दिखने लगते हैं. ये दवा के असर के सबूत हैं. धीरे धीरे ये डॉट्स बड़े होते हैं और फिर सफेद जगह भी बाकी त्वचा के रंग माफिक हो जाती है.

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अल्सर के इलाज के लिए ये 2 दवाएं और थोड़ा एहतियात बरतें तो जल्द आराम मिलेगा

पेट में अक्सर दर्द और जलन होना और कुछ भी गर्म पीने पर परेशानी बढ़े, फिर तो समझ लेना चाहिये कि अब लापरवाही नहीं चलने वाली. ऐसी तकलीफ होने पर बगैर वक्त गवांए डॉक्टर से संपर्क कर सलाह लेनी चाहिये.

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Aloe Socotrina के बारे में कितना जानते हैं आप – जानिए 5 खास बातें

Aloe Socotrina के बारे में हम बताना चाहते हैं कि जैसे ये दस्त और पेट की तकलीफों से हमें निजात दिलाती है, उसी तरह सिरदर्द में भी आराम देती है. अब सवाल है कि सरदर्द होने पर किस तरह के लक्षणों में ये दवा लेनी चाहिये?

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Eupatorium Perf से डेंगू को ठीक करने का दावा कितना सही है?

अब बीमारी का नाम डेंगू हो या फिर चिकनगुनिया या फिर सामान्य सर्दी जुकाम Eupatorium Perf से फायदा हो सकता है, लेकिन छू मंतर जैसी कोई बात नहीं है.

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हर्निया के ज्यादातर मामलों में Nux Vomica और Sulphur बेहद कारगर हैं

हर्निया के ज्यादातर मामलों में Nux Vomica और Sulphur से ही फायदा देखने को मिलता है. जरूरत पड़ने पर दोनों दवाएं लोअर पोटेंसी में एक साथ भी चलाई जा सकती हैं. जब Nux Vomica की लोअर पोटेंसी का असर दिखे तो धीरे धीरे उसे बढ़ाया जा सकता है.

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चक्कर आने की कई वजहें हैं, ये होम्योपैथिक दवाएं ली जा सकती है

कई बार इसकी वजह कमजोरी होती है तो कभी पेट की गड़बड़ी भी हो सकती है. उल्टी और दस्त होने के बाद भी चक्कर आ सकता है – और वैसी स्थिति में ध्यान देने की जरूरत होती है. ऐसा होने पर सबसे पहले तो पानी और उसके बाद नींबू, नमक और चीनी का घोल लिया जा सकता है.

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Staphysagria के बारे में कितना जानते हैं आप – जानिए 5 खास बातें

हम आपको बता रहे हैं होम्योपैथ की ऐसी दवा के बारे में जो बहुत प्रचलित नहीं है – Staphisagria. वैसे तो Staphisagria यौनेच्छा और कामुक ख्यालों जैसी मानसिक स्थितियों में काफी कारगर पायी जाती है लेकिन इमरजेंसी में भी बड़े काम की दवा है.

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FAQ: होम्योपैथिक दवाएं कैसे लेनी चाहिये – कितनी गोली, कितने बूंद और कितनी बार?

दो बूंद जिंदगी के – ये लाइन तो हर किसी के मन में अपने आप आ जाती है. होम्योपैथी में ये प्रैक्टिस इसकी शुरुआत से ही है. अक्सर देखा जाता है कि डॉक्टर मरीज की जीभ पर दवा की दो बूंद डाल देते हैं.

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Bryonia के बारे में कितना जानते हैं आप – जानिए 5 खास बातें

हम बात कर रहे हैं होम्योपैथ की उस दवा के बारे में जिसका नाम ज्यादातर लोगों को मालूम होता है – Bryonia Alba. आम तौर पर Bryonia बदन में दर्द, बुखार और गठिया जैसी तकलीफों में इस्तेमाल की जाती है – लेकिन उससे इतर भी ये दवा काफी उपयोगी साबित होती है.

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सेक्स समस्याएं – शीघ्रपतन से छुटकारा पाने के लिए ये 3 दवाएं काफी हैं

शीघ्रपतन [Premature Ejaculation] वैसे तो कोई बीमारी नहीं है, लेकिन परेशानी बहुत बड़ी है. इसे बीमारी की बजाय उसके पहले की अवस्था के तौर पर समझा जा सकता है.

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हिंदी में होम्योपैथी को समझने के लिए ये 2 किताबें पर्याप्त हैं

यहां हम सिर्फ दो किताबों का जिक्र करेंगे. ये दोनों ही किताबें होम्योपैथी के फंडामेंटल को समझाती हैं और प्रामाणिक ग्रंथ भी हैं. इनमें से एक तो खुद होम्योपैथी के संस्थापक डॉ. सैमुअल हैनिमन ने लिखा है – और दूसरी होम्योपैथी के अपने जमाने के बहुत बड़े एक्सपर्ट एच सी एलन ने.

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5 मिनट में हैंगओवर से उबारने में कारगर 5 होम्योपैथिक दवाएं

कोशिश तो यही होनी चाहिये कि न ड्रिंक किया जाये और न हैंगओवर की नौबत आये. फिर भी कभी पार्टी में या मौका विशेष के चलते ड्रिंक से बच नहीं पाये और फिर हैंगओवर हो जाये तो होम्योपैथिक दवाओं का इस्तेमाल किया जा सकता है, शर्त एक ही है – डॉक्टर से पूछ कर.

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होम्योपैथी को समझना चाहते हैं तो ये 5 किताबें जरूर पढ़ें

अगर आप होम्योपैथी का अध्ययन करना चाहते हैं तो हैनिमन कैफे की सलाह है कि वे किताबें पढ़ें जिनमें प्रामाणिक जानकारी हो. होम्योपैथी के आविष्कारक डॉ. सैमुअल हैनिमन के अलावा भी कई एक्सपर्ट ने ऐसी किताबें लिखी हैं.

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आंखों की बिलनी से निजात दिलानेवाली ये हैं तीन दवाएं

अगर आंखों को वे अपना कार्यक्षेत्र बना लें फिर तो नींद ही नहीं जीना हराम कर देते हैं.
पलकों पर होने वाली ऐसी ही फुंसियों को बिलनी, गुहेरी या गुहाज्जनी भी कहते हैं. इनकी हर अवस्था बड़ी कष्टकारी होती है – जब निकल आएं, उनमें पस भर आए या फिर फूट कर पस बहने लगे.

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FAQ – 014 : होम्योपैथिक दवाएं कुछ खाने के बाद लेनी चाहिए या बिलकुल खाली पेट?

पेट की बीमारियों में कुछ दवाएं खाने के पहले और बाद में लेना ठीक होता है. ऐसा करने का फायदा ये होता है कि पहले दवा लेकर तकलीफ से बचा जा सकता है और बाद में फौरन आराम मिल जाता है.

केस स्टडी: जल जाने पर इलाज के लिए Urtica Urens से बेहतर कोई दवा नहीं

एक शाम की बात है. सुलभा घर पर अकेली थीं. उन्होंने चाय बनाई और टीवी के सामने सोफे पर जहां वो हमेशा बैठा करतीं, बैठ गईं. कप साफ नहीं थे इसलिए उस दिन चाय उन्होंने प्लास्टिक के डिस्पोजेबल ग्लास में ली थी. जैसे ही चाय पीने को हुईं पूरा ग्लास पलट कर उनके ऊपर गिर गया. चाय बहुत ही गर्म थी. ग्लास में डाले एक मिनट भी नहीं हुए होंगे.

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इन 5 दवाओं की जरूरत किसी को भी कभी भी पड़ सकती है

कई छोटी मोटी तकलीफें हमें अक्सर परेशान करती रहती हैं. ऐसी तकलीफें कभी भी किसी को भी हो सकती हैं. यहां हम ऐसी दवाओं के बारे में बता रहे हैं जिन्हें आप अपने डॉक्टर की सलाह से पास में रख सकते हैं और जरूरत पड़ने पर इनका इस्तेमाल कर सकते हैं.
ये बॉयोकेमिक दवाएं हैं और इन्हें गुनगुने पानी के साथ लेना ठीक रहता है.

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खोई हुई ताकत और जवानी पाने के लिए ये 6 दवाएं बड़े काम की हैं

यहां हम ऐसी ही कुछ दवाएं बता रहे हैं जो कमियों को दूर हमारे शरीर को तंदुरूस्त बनाती हैं. अपने डॉक्टर की सलाह से आप इन्हें जरूरत के हिसाब से ले सकते हैं.

पेट को दुरूस्त रखने के लिए इन 6 दवाओं के बारे में जरूर जानना चाहिए

पेट का सीधा संबंध हमारे दिमाग से होता है. यानी, पेट खराब तो दिमाग खराब. दिमाग खराब तो पेट खराब. अगर देखा जाए तो हमारे दिमाग और पेट में बड़ा ही नाजुक और करीबी रिश्ता है और नियमित रूप से ये उसे निभाते भी हैं.

# खोई हुई ताकत और जवानी पाने के लिए ये 6 दवाएं बड़े काम की हैं

माना जाता है कि पेट की 90 फीसदी बीमारियों का हमारे मस्तिष्क से सीधा कनेक्शन है.


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