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Posts for Tag : रोकथाम

केस स्टडी: जल जाने पर इलाज के लिए Urtica Urens से बेहतर कोई दवा नहीं

एक शाम की बात है. सुलभा घर पर अकेली थीं. उन्होंने चाय बनाई और टीवी के सामने सोफे पर जहां वो हमेशा बैठा करतीं, बैठ गईं. कप साफ नहीं थे इसलिए उस दिन चाय उन्होंने प्लास्टिक के डिस्पोजेबल ग्लास में ली थी. जैसे ही चाय पीने को हुईं पूरा ग्लास पलट कर उनके ऊपर गिर गया. चाय बहुत ही गर्म थी.

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एसिडिटी, बदहजमी और पेट में गैस बने तो ये हैं 5 कारगर दवाएं

पेट में एसिडिटी, खट्टी डकारें और गैस बनना – ये सब अमूमन खान पान की गड़बड़ी से होते हैं. कई इनकी वजह मानसिक तनाव भी होता है. ऐसे में तनाव दूर करने के उपायों के साथ साथ अगर खान पान पर थोड़ा ध्यान रखा जाए तो एसिडिटी और ऐसी परेशानियों से बचा जा सकता है.

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इन 5 दवाओं की जरूरत किसी को भी कभी भी पड़ सकती है

कई छोटी मोटी तकलीफें हमें अक्सर परेशान करती रहती हैं. ऐसी तकलीफें कभी भी किसी को भी हो सकती हैं. यहां हम ऐसी दवाओं के बारे में बता रहे हैं जिन्हें आप अपने डॉक्टर की सलाह से पास में रख सकते हैं और जरूरत पड़ने पर इनका इस्तेमाल कर सकते हैं.
ये बॉयोकेमिक दवाएं हैं और इन्हें गुनगुने पानी के साथ लेना ठीक रहता है.

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खोई हुई ताकत और जवानी पाने के लिए ये 6 दवाएं बड़े काम की हैं

यहां हम ऐसी ही कुछ दवाएं बता रहे हैं जो कमियों को दूर हमारे शरीर को तंदुरूस्त बनाती हैं. अपने डॉक्टर की सलाह से आप इन्हें जरूरत के हिसाब से ले सकते हैं.


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ये 5 बॉयोकेमिक दवाएं हर किसी के लिए बेहद उपयोगी हैं.

इन 12 बॉयोकेमिक दवाओं को मिलाकर कुछ 28 Bio Combinations तैयार किये गये हैं. इन्हीं में से पांच का हम यहां जिक्र कर रहे हैं जो हर किसी के काम आ सकती हैं.


1. Biocomb 01 – अगर शरीर में खून की कमी हो जाए तो होम्योपैथिक इलाज के साथ इसे भी लेने की डॉक्टर सलाह देते हैं.

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FAQ – 012 : अगर पूरे शरीर में जगह जगह गांठ हो गई हो तो कौन सी दवा लेनी चाहिए?

कई बार ये गांठें दूसरी वजहों से भी बन जाती हैं. मसलन, हमारे शरीर की खासियत है कि जब उसे लगता है कि कोई बाहरी वस्तु (Foreign Body) घुस गई है तो अपनेआप वो उसे चारों ओर से घेर लेता है – ताकि वो शरीर को कोई नुकसान पहुंचाने के लायक न रहे.

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वेट लॉस का बेस्ट फॉर्मूला – मीठी गोलियां और भर पेट भोजन – बस और कुछ नहीं

संभावित दवाएं – अगर वजन सामान्य से ज्यादा है तो वो किसी बीमारी की वजह से हो सकता है. अगर सामान्य से कम है तो भी किसी न किसी रोग की वजह से ही होगा. इसलिए जरूरी है कि उस खास रोग के लिए उपाय किये जाएं – बाकी समस्या अपनेआप खत्म हो जाएगी.


काले घने और सुंदर बालों के लिए मीठी गोलियों की चार खुराक काफी है

अब अगर किसी वजह से बाल गिरने लगें या कम उम्र में ही सफेद हो जाएं तो उपचार जरूरी हो जाता है. सबको यही सलाह है कि कलर करने या कोई अन्य उपाय करने से पहले किसी क्वालिफाइड होम्योपैथ से जरूर संपर्क करें.


संभावित दवाएं
+ Lycopodium और Acid Phos –

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हर चीज की तरह होम्योपैथी को भी अपनी हद है, अपनी ही थ्योरी के कारण

होम्योपैथी की खोज जिस समानता की थ्योरी पर हुई उसकी कुछ अपनी सीमाएं हैं. इसके तहत होम्योपैथिक रेमेडीज रोगी के शरीर में एक छद्म रोग की अवस्था (जब रोग बढ़ा हुआ या घटा हुआ प्रतीत होता है) पैदा कर देती है जिसके प्रभाव से असल रोग का प्रभाव खत्म हो जाता है. कुछ देर बाद छद्म रोग की अवस्था भी खत्म हो जाती है –

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FAQ – 006 : होम्योपैथी में खूब परहेज जरूरी है क्या?

होम्योपैथिक दवाएं देने के साथ ही कोई भी डॉक्टर एक साथ लहसुन, प्याज, हींग, अदरक खाने के लिए मना करता है. साथ में – चाय, कॉफी और सुर्ती-तम्बाकू की भी मनाही होती है.


हर मर्ज का तो नहीं लेकिन हर मरीज का इलाज जरूर है होम्योपैथी में

ऐसे बहुत लोग मिलते हैं जो होम्योपैथी को बताते तो अच्छा हैं, पर उसी वक्त पूछते हैं – फलां बीमारी का इलाज है होम्योपैथी में?
निश्चित रूप से होम्योपैथी में इलाज तो है लेकिन किसी खास बीमारी का नहीं, बल्कि तकलीफ से तड़प रहे हर बीमार का. आइए इसे सरल तरीके से समझने की कोशिश करते हैं.

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हर मर्ज की कई दवाएं
होम्योपैथिक ट्रीटमेंट में रोग नहीं,

होम्योपैथी को लेकर भ्रम न पालें, पहले इस्तेमाल करें फिर विश्वास करें

होम्योपैथी को लेकर ढेरों मिथ (MYTHS) हैं – वजह जो भी हों आम लोगों में ये भ्रम व्याप्त है कि होम्योपैथी चिकित्सा में बड़े पेंच हैं. शायद, ये भी एक वजह है कि बहुत सारे लोग यूं ही होम्योपैथी से दूरी बनाए रखते हैं. आइए ऐसी ही कुछ बातों पर गौर करते हैं.

भ्रम: होम्योपैथिक दवाओं का असर धीरे धीरे होता है.

मीठी गोलियां कितनी कारगर – I

मीठी गोलियां कितनी कारगर हो सकती हैं? ये सवाल बहुत लोगों के मन में होता है कि मीठी गोलियों का भला कितना असर होगा? ऐसी आशंका स्वाभाविक है. जिस किसी ने भी होम्योपैथी को ठीक से समझा न हो – और न ही कभी तरीके से इलाज न कराया हो, उसके मन में धारणा तो ये रहेगी ही.

ऐसा तब भी हो सकता है जब आप किसी क्वालिफाइड प्रोफेशनल की बजाए किसी दोस्त,

जर्मन रेमेडीज ही क्यों, इंडियन क्यों नहीं?

आपने ध्यान दिया होगा अक्सर होम्योपैथिक फिजीशियन जर्मन रेमेडीज लेने की सलाह देते हैं. इंडियन दवाएं लेने की बात तब होती है जब महंगी जर्मन दवाएं लेना संभव न हो.
तो क्या इंडियन दवाएं ठीक नहीं होतीं. क्या इंडियन होम्योपैथिक रेमेडीज का असर नहीं होता. आइए एक वाकये से इसे समझने की कोशिश करते हैं.

घर में किसी को कुछ तकलीफ थी.

वर्ल्ड होम्योपैथिक डे – आज कुछ मीठा तो हो ही जाए

बनारस से हम लोग मडुवाडी-दिल्ली एक्सप्रेस में सवार हुए. हम दोनों की नीचे वाली बर्थ थी. ऊपर वाली दोनों बर्थ खाली थी. टीटीई ने बताया कि वो इलाहाबाद का कोटा है. हम लोग खा-पीकर सो गये.

आधी रात को कोटा पूरा होने का वक्त आ गया. जब हमारी नींद खुली तो दो लोग दिखे. एक आदमी सामान भी रख रहा था –

वर्ल्ड होम्योपैथिक डे की बधाई!

वर्ल्ड होम्योपैथिक डे की हैनिमन कैफे की ओर से बहुत बहुत बधाई. आपके जीवन में इतनी मिठास बनी रहे कि इलाज के लिए मीठी गोलियों की भी जरूरत न पड़े.[पूरा पढ़ें]



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