मैं इलाज से थक चुका था. मैंने डॉक्टर की बतायी सभी सावधानियां बरतीं और दवाएं भी लीं मगर कोई सुधार नजर नहीं आया. दोपहर कम ही खूबसूरत होती है. उस दिन अचानक मुझे एक उपाय सूझी. मुझे अपने बचपन का वाकया याद आया. जब हमलोग बच्चे थे